Best horror stories in hindi । New Story 2020 | Bali kanya । बलि कन्या ।

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   दोस्तों आज की kahani कुछ खास है। hindi stories of ghost( Bali kanya) इस कहानी में एक बहादुर लड़की होती है जिसे कुछ राक्षस उठा कर ले जाते हैं। Bhootiya Kahaniya, Darawani kahaniya आज हम इस horror story में देखेंगे कि किस प्रकार एक लड़की अपनी जान राक्षसों से बचाती है। Hindi scary stories ,  वह बहादुर होने के साथ साथ बुद्धिमान भी है।



              बली कन्या

                   Bali kanya


   एक समय की बात है, गोरखपुर नाम के एक गाँव में एक सुंदर, समझदार और बहादुर लड़की रहती थी जिसका नाम चंचल था।

चंचल के माता पिता बचपन मे ही गुजर गए थे। वह अपने दादा और दादी के पास रहती थी।

चंचल एक बहुत ही समझदार लड़की थी गाँव मे हर कोई उसकी सराहना करता था। उसकी समझदारी के लिए तो सरकार ने भी उसे पुरस्कृत किया था।

यह बात तब की है जब गाँव में एक एक करके सभी बच्चे गायब हो रहे थे। उनके माता पिता ने इसकी शिकायत पुलिस को भी की किन्तु पुलिस भी बच्चों को ढूंढ नहीं पा रही थी। तभी अचानक एक दिन चंचल भी गायब हो जाती है।

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 उसके दादा दादी बहुत चिंतित हो जाते हैं। वो पुलिस को इसकी खबर पहुचते हैं और उनसे चंचल को ढूंढने के लिए आग्रह करते हैं।
दरअसल चंचल और सभी बच्चों को एक आतंकवादी गिरोह बंदी बना लेता है।

वो ये सब करके अपने साथी को पुलिस की गिरफ्त से छुड़ाना चाहते थे। पर चंचल ने उनके अड्डे की अच्छी तरह छान बीन की और वहाँ से निकलने का रास्ता ढूंढ़ लिया।

 चंचल ने योजना बनाई की जब सारे पहरेदार सो रहे होंगे तब वह वहाँ से भागेगी।

जब सारे पहरेदार सो गए तब चंचल वहाँ से भाग कर सीधा पुलिस थाने गई और सारी घटना उनको बता दी। फिर क्या पुलिस ने पूरी तैयारी के साथ उन आतंकवादियों पर हमला कर दिया और सभी बच्चों को बचा लिया।

जब पुलिस सभी बच्चों को गाँव लेकर पहुंची तो सब लोग उनका सुक्रिया अदा करने लगे।


तब उन्होंने कहा कि यह सब चंचल की वजह से संभव हुआ है। जिसने सही वक्त पर हमें उनकी जानकारी दी।

 इसके लिए पुलिस ने उनको यह अस्वाशन दिलाया कि चंचल को उसकी बहादुरी के लिए सरकार की तरफ से पुरस्कृत किया जाएगा।

 यह सब सुनकर चंचल के दादा और दादी बहुत खुश हुए और उन्होंने चंचल को अपने गले से लगा लिया। उसके बाद गाँव मे सब खुशी खुशी रहने लगे।

कुछ समय पश्चात गाँव में कुछ राक्षस किसी को तलाश करते हुए आ पहुचते हैं। वो बेहद खतरनाक और डरावने थे लोग उनसे डरकर इधर उधर भागने लगते हैं

 राक्षस उन्हें पकड़ कर खा जाते हैं। वो लोगों के घरों को नष्ट कर रहे थे। वो एक ऐसी कन्या की तलाश कर रहे थे जो कि एक शुभ मुहूर्त में पैदा हुई हो।

 जिसकी कुंडली में राहु केतु का वास न हो। वो उस कन्या की बली देकर देव लोक पर राज करना चाहते थे।
क्योंकि बली देने से उनको असीम शक्ति प्राप्त होती जिनसे वह किसी को भी आसानी से पराजित कर सकते थे।

वो गाँव में तोड़ फोड़ करते हुए चंचल के घर की ओर पहुंचे। जब चंचल और उसके दादा दादी ने बाहर इतना शोर सुना तो वो बाहर निकल कर आ गए। राक्षस अब लोगों के घरों को जला रहे थे।

जब राक्षसों ने चंचल को देखा तो सब कुछ बंद कर दिया और जोर जोर से हंसने लगे और कहने लगे कि उनकी वर्षो की खोज पूरी हुई।

 यह सब सुनकर चंचल को आश्चर्य हुआ और वह सोंचने लगी कि ये किस खोज की बात कर रहे हैं।

 अब राक्षसों ने देरी न करते हुए चंचल को उठा लिया और उसके दादा दादी को धक्का दे दिया जिससे वो गिर पड़े उनको चोट भी लग गई।

 देखते ही देखते वो राक्षस चंचल को वहाँ से लेकर चले गए। जैसे ही चंचल के दादा दादी को होश आया तो वो भागते भागते पुलिस थाना गए और उन्होंने पुलिस को सब कुछ बता दिया।
अब पुलिस वाले भी चंचल की खोज में लग गए।
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इधर वो राक्षस चंचल को उनके अड्डे पर ले जा चुके थे। बली अमावस्या की रात को देनी थी जिसमे अभी तीन दिन बांकी थे। इसलिए उन्होंने चंचल को एक कोठरी में बंद कर दिया और बाहर पहरेदार तैनात कर दिए।

अगले दिन जब पहरेदार चंचल को खाना देकर जा रहा था तो वह अपने से बात कर रहा था कि कल में जब मंदिर में रखी मूर्ति साफ कर रहा था तब वह गलती से थोड़ी हिल गई थी तो गुरुजी मुझपर बहुत गुस्सा हुए।



वह कह रहे थे अगर मूर्ति को कुछ हो जाता तो हम सबका अस्तित्व मिट जाता।  क्योंकि हम सबकी जान इस मूर्ति में है इसलिए ये हमारे देवता हैं।

अब जब भी तुम इसे दुबारा साफ करो तो ध्यान रखना ये हिले नहीं। यह सब चंचल सुन लेती है और कहती है कैसे भी करके अब उसे उस मूर्ति तक पहुचना है।

अगली रात चंचल की बली देनी थी इसलिए सब बली की तैयारी में लग जाते हैं। इधर चंचल उस मूर्ति को तोड़ने के उपाय सोंच रही होती है।

जब चंचल को वहां ले जाया गया तो चंचल ने अपने साथ एक पत्थर का ले लिया। बली के समय सभी को अपनी आंखें बंद करके मंत्रो का उच्चारण करना था।

इसी मौके का फायदा उठाकर चंचल बली स्थल से मंदिर की ओर दौड़ी। तभी राक्षसों के गुरु को पता चल गया कि बली कन्या वहाँ नहीं है।

 तब उसने सबको चंचल को ढूंढने का आदेश दिया। सब इधर उधर चंचल को ढूंढने लगते हैं। तभी गुरु मंदिर में पहुंचता है और पाता है कि चंचल के हाथ मे वह मूर्ति है।

 वह अपनी शक्ति से चंचल को हवा में लटका देता है और मूर्ति की मांग करता है।

 पर चंचल उसे मूर्ति नही देती है। तब गुरु चंचल को दीवार से टकराता है और चंचल के हाथ से वह मूर्ति नीचे गिर जाती है।

 गुरु मूर्ति को पकड़ने की हर संभव कोशिश करता है पर वह असफल हो जाता है और मूर्ति टूट जाती है।
जिससे सभी के शरीर मे आग लग जाती है और सभी तड़पने लगते हैं।

उनका पूरा अड्डा आग की लपटों में खो जाता है। इसी बीच चंचल भी निकलने की कोशिश करती।
 वह गुफा से बाहर की तरफ दौड़ती है पर आग की लपटें और तेज हो जाती हैं। जिससे उसे बाहर जाने में तकलीफ होती है।



पर कैसे भी करके वह गुफा के बाहर निकल जाती है और बेहोश हो जाती है। तब वहां पुलिस पहुचती है और चंचल को सही सलामत उसके दादा और दादी के पास छोड़ देती है।

इस तरह चंचल ने एक बार फिर अपनी सूझ बूझ से उन राक्षसों को मात दे दी और वह फिर अपने दादा और दादी के साथ खुशी खुशी रहने लगी।

इसलिय कहते हैं मुश्किल चाहे जितनी हो हमे कभी हार नहीं माननी चाहिए।


 पढ़ने के लिए धन्यवाद

 तो दोस्तों कैसी लगी आपको हमारी short story उम्मीद है कि अच्छी ही लगी होगी। आपको जैसी भी हमारी kahani लगी हो आप हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

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