Horror stories for kids in hindi । शैतानी शव । Shaitani shav

 मैं आज आप के लिए एक बेहद डरावनी hindi horror stories  कहानी लेकर आया हूँ।
यह कहानी एक अंधे बच्चे के ऊपर आधारित है। यह एक प्राचीन काल की  , true horror story , true story है। इसमें हम देखेंगे की कैसे एक अंधा बच्चा भूतों से सामना करता है। जिसका शीर्षक है शैतानी शव (shaitani shav).
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                 शैतानी शव  


   बहुत समय पहले की बात है। एक गाँव मे दुर्जन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही भोला भाला था वह हमेशा लोगों की मदद करने के लिए तैयार रहता था।

इसलिए लोग भी उससे प्यार करते थे। दुर्जन के माता पिता की मृत्यु एक हादसे में हो गई थी और उसी हादसे में दुर्जन ने अपने देखने की शक्ति खो दी थी।
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तब से वह अपने दूर के रिश्तेदार के यहाँ रहने लगा था उसके चाचा और चाची उससे अच्छा व्यवहार नहीं करते थे और उसको घर के काम करने के लिए कहते थे।

अगर दुर्जन कोई गलती करता था तो उसकी चाची उसे डंडे से मरती थी और उसे अलग कमरे में बंद कर देती थी। कुछ खाने को भी नही देती थी।

दुर्जन बेचारा भूखा प्यासा उस कमरे में बंद रहता था और जब सुबह होती थी तो उसकी चाची उसे रात की सूखी रोटी खाने को देती थी।

परंतु दुर्जन फिर भी इस सब से दुखी नही होता था क्योंकि जब वह गाँव घूमने जाता तो वह लोगों की मदद कर देता था जिससे कि लोग उसे उपहार स्वरूप कुछ खाने की चीजें दे दिया करते थे। ये सब ऐसे ही चलता रहता था।



एक दिन जब दुर्जन गाँव घूमकर वापस घर जा रहा होता है तो रास्ते मे उसे किसी के रोने की आवाज सुनाई देती है और वह उस ओर चल देता है यह जानने के लिए की आखिर रो कोन रहा है और क्यों?

जब दुर्जन उस व्यक्ति के पास पहुँचता है तो उसे पता चलता है कि वह एक दुर्बल बूढा इंसान है। दुर्जन उनसे उनके रोने का कारण पूंछता है तो वह ज्यादा कुछ दुर्जन को नही बताते है।

 बस रोने लगता है। तो दुर्जन उनके पास बैठ जाता है और उनसे फिर पूंछता है कि आप क्यों रो रहे है? तब बड़ी मुश्किल से वह बूढ़ा इंसान अपने रोने का कारण दुर्जन को बताता है। वह कहता है कि उसकी एक छोटी बच्ची है जिसका नाम खुशी है।

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 कल रात जब में सो रहा था तो किसी ने उसकी बच्ची को अगवाह कर लिया और वहाँ पर एक चिट्ठी छोड़ दी जिसमे लिखा था कि अगर तुमने कब्रिस्तान जाकर उस मरे हुए शव को नहीं लाये जिसकी बली देने से सारी शैतानी शक्ति मिल जाती हैं तो मैं तुम्हारी बच्ची को मार कर खा जाऊंगा ।

यह सब सुनकर दुर्जन बहुत चिंतित हो जाता है। वह उस बूढ़े इंसान की मदद तो करना चाहता है पर वह यह कैसे करे इस सोंच में डूबकर वहाँ से घर की ओर चल देता है।

 वह रात में बहुत सोने की कोशिश करता है। किंतु उसे नींद नहीं आती बार बार उसके मन मे एक ही खयाल आता है कि कैसे में उस बूढ़े इंसान की मदद करूं।



 जब उसे बार बार कोशिश करने पर भी नींद नही आती तो वह उस जगह जाता है जहाँ उसके माता पिता को दफनाया गया था। वह वहाँ जाकर जोर जोर से रोने लगता है।और बार बार एक ही बात दोहराता है कि काश में उस बूढ़े इंसान की मदद कर पाता।

 यह सब सुनकर और अपने बेटे को रोटा देख उसके माता पिता की आत्मा वहाँ आ जाती है। और दुर्जन को पुकारने लगते है। वह आवाज सुनकर दर जाता है और बाद में जब उसे पता चला कि वो उसके माता पिता है तो उसने उनको प्रणाम किया।

तब उसके माता पिता ने उससे पूंछा की वह रो क्यों रहा है तो दुर्जन ने उन्हें सब कुछ बता दिया। और उनसे उसकी मदद करने के लिये आग्रह करता है।

उसके माता पिता उसकी मदद करने के लिए राजी तो हो जाते हैं किंतु वो दुर्जन से कहते है कि उस शव को केवल जिंदा इंसान ही वहां से ला सकता है पर आज तक जो भी उसे लेने गया है।

 तो वह वापस नहीं लौटा है। क्योंकि उस कब्रिस्तान में जगह जगह पर खतरे हैं।

इसपर दुर्जन कहता है कि में देख नही सकता पर अगर आप मेरे शरीर मे प्रवेश करके उसे उस शव तक पहुंचा दें तो वह उस शव को वहाँ से ला सकता है।

उसके माता पिता राजी हो जाते है। पर फिर भी उन्हें एक अच्छी योजना की जरूरत है। वो थोड़ा सोंचते है और फिर दुर्जन के शरीर मे प्रवेश करते है और उस कब्रिस्तान की ओर चल देते है।

जब वो कब्रिस्तान के दरवाजे पर पहुंचते है तो उनका सामना इंसानो को खाने वाले भूतों से हुआ।

 दुर्जन के माता पिता को दुर्जन की चिंता थी इसलिए अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए और उन भूतो से मुकाबला करने के लिए वह दुर्जन के शरीर के बाहर आ गए और योजना के हिसाब से दुर्जन की माँ को उन भूतों का ध्यान भटकाना था और दुर्जन के पिता को दुर्जन को सही सलामत उस शव तक पहुंचाना था।

 जब दुर्जन की माँ उन भूतों के सामने गई तो वो सब उसकी खूबसूरती पर मोहित हो गए। और मौका मिलते ही दुर्जन की माँ ने उनसब भूतों को बेहोश कर दिया। इधर दुर्जन के पिता दुर्जन को सही सलामत कब्रिस्तान के भीतर ले गए। पर आगे भी मुश्किलें कम ना थीं।



उस आदमी का शव कब्रिस्तान के बूचों बीच था। जिसकी रक्षा साधु लोग कर रहे थे। जिनको चकमा देना लगभग असंभव था। पर उस शव की एक खास बात थी।

 अगर कोई जिंदा इंसान उसे छू लेता तो वह उसके साथ जाने के लिए तैयार हो जाता और फिर उसे रोकने वाली सारी शक्तियां विफल हो जातीं।

इस बात को ध्यान में रखते हुए दुर्जन और उसके पिता ने एक योजना बनाई कि अगर दुर्जन अपने अंधे होने की बात उन साधुओं को बताता है और उनसे कहता है कि वह भटकर यहां आ गया है तो हो सकता है कि साधु उसके बारे में कुछ सोंचे।

उसके पिता ने उस शव के बारे में सब कुछ दुर्जन को बता देते हैं। कि वह कितनी दूरी पर है और किस दिशा में है।

अब दुर्जन साधुओं के बीच योजना अनुसार पहुंचता है और उस शव की और आगे बढ़ते हुए उनसे वही सब कुछ कहता है जो उसके पिता ने उससे कहने को कहा था।

 किंतु साधुओं को दुर्जन की बात पर यकीन नहीं होता और वो उसपर हमला करने ही वाले होते है।

 पर दुर्जन का पैर फिसल जाता है और वह गिर पड़ता है। जब वह गिरता है तो उसकी उंगली थोड़ी सी उस शव को छू जाती है। जिससे वहां आसमान से एक अनोखी चीज उस आसमान से आ गिरती है। और पूरा कब्रिस्तान रोशनी से भर जाता है।

रोशनी के कारण सभी भूत और साधु अचानक गायब हो जाते है।और फिर दुर्जन उस शव को उठाकर उस कब्रिस्तान से अपने माता पिता के साथ उस बूढ़े आदमी की और चल देता है।

जब वो वहां पहुंचने ही वाले होते है तो उसके माता पिता उससे विदा लेते है और कहते है कि अगर कभी भी उसे उनकी जरूरत पड़े तो वह उन्हें याद कर ले वह उसकी मदद के लिये  वहां पहुंच जाएंगे। ऐसा कहते हुए वो वहां से चले जाते है।

जब दुर्जन उस शव को लेकर उस बूढ़े इंसान के पास पहुंचता है तो वह बूढा उस शव को देखकर बहुत खुश हुआ और अपनी छोटी बच्ची को बचाने के लिए वह दुर्जन के साथ उन हब्शियों के अड्डे पर गए।

 उन्होंने वहां देखा कि लोग इंसानो की बली दे रहे थे और वह उन्हें ऐसे ही खा रहे थे। जब वो शव को लेकर उनके सरदार के पास पहुंचे तो शव को देख कर सरदार बहुत खुश हुआ।

उसने तांत्रिको से कहा कि बली कि तैयारी शुरू कर दो। पर दुर्जन ने कहा कि हम बच्ची  को देखना चाहते हैं।

 सरदार ने बच्ची उन्हें सौंप दी और दुर्जन ने शव दे दिया पर दुर्जन यह नहीं चाहता था कि ये लोग असीमित शक्तियों के मालिक बने इसलिए उसने अपने माता पिता याद किया और वो वहां आ गए।

 दुर्जन ने अपने माता पिता से कहा कि वो उस शव के शरीर मे प्रवेश उसे कहीं दूर ले जाएं। पर उसके पिता को डर था कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो ये हब्शी इन्हें जिंदा नहीं छोड़ेंगे इसलये वह अपनी पत्नी से बोले कि पहले तुम इन सब को लेकर पास वाले मंदिर में पहुंचो।


 मैं तुम्हे वहीं मिलूंगा। दुर्जन की माँ ने ऐसा ही किया वो दुर्जन और छोटी बच्ची के साथ उसके बूढे पिता को लेकर पास के मंदिर में पहुंच गई।

इधर दुर्जन के पिता उस शव के शरीर में घुसकर चलने लगे शव को चलता देख सब हैरान हो गए और उसका पीछा करने लगे परंतु दुर्जन के पिता कैसे भी बचते बचाते उस मंदिर तक पहुंचे।

 उन्हें सही सलामत देख कर सब खुश हुए पर मुसीबतें अभी काम नहीं हुई थीं क्योंकि अभी भी वो हब्शी लोग उन्हें ढूंढ रहे थे।

 इसलिए दुर्जन और उस बूढ़े इंसान को बचाने के लिए दुर्जन के पिता ने कहा कि दुर्जन तुम इस शव की बली दे दो। पर दुर्जन इसपर कहता है कि उससे यह नही होगा। उसके पिता के बहुत समझने पर दुर्जन राजी होता है।

 सबकी रक्षा के लिए दुर्जन ने जैसे ही शव का सिर काटा तो उसमें से एक अजीब सी रोशनी बाहर निकली और आवाज आई कि दुर्जन मुझे आजाद करने के लिए तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया में यहाँ वर्षो से बंद था। मेरा नाम मृघट है।

मुझे एक साधु ने श्राप दिया था कि में शव बन जाऊंगा और जब तक कोई इस शव की बली नहीं देता में आजाद नही होता।

आज तुमने मुझे आजाद करके मुझपे उपकार किया है इसलिए मैं तुम्हारी कोई तीन इच्छायें पूर्ण कर सकता हूँ। कहो क्या इच्छाएं है तुम्हारी?

दुर्जन सबसे पहले मृघट को प्रणाम करता है और अपनी पहली इच्छा स्वरूप कहता है कि वह उनकी रक्षा करें। दूसरी इच्छा प्रकट करते हुए कहता है कि मैं एकबार फिर अपने माता पिता को अपनी आंखों से देखना चाहता हूँ।

ऐसा कहते ही उसकी आँखों की रोशनी वापस आ जाती है और उसके माता पिता बहुत खुश होते है। और अपनी तीसरी इच्छा के रूप में वह लोगों की समृद्धि की मांग करता है।


दुर्जन को खुश देख कर उसके माता पिता को भी मुक्ति मिल जाती है और वो चले जाते हैं। फिर दुर्जन अपने चाचा चाची के साथ खुशी खुशी रहने लगता है और उसके पास अच्छा खासा धन हो जाता है।

अब वो दुर्जन को विद्यालय भी भेजते हैं। दुर्जन के गांव में बहुत दोस्त बन जाते हैं अब वह और ज्यादा खुश रहने लगता है।

पढ़ने के लिए धन्यवाद

तो दोस्तों कैसी लगी आप को ये true horror stories, उम्मीद है आपको पसंद आई होगी।

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