Horror stories short । Mout ki chitthi । मौत की चिट्ठी ।


आज में आप लोगों के लिए एक horror stories hindi लाया हूं। यह story एक चिट्ठी (horror letter) पर आधारित है। जिसमें कुछ दोस्तों को एक party का invitation मिलता है। जो कि उनकी मौत का कारण बनती है।


मौत की चिट्ठी

                  Mout ki chitthi

लावला नामक शहर में एक व्यापारी रहता था। उसका नाम रतन सिंह था। वह बहुत ही समृद्ध और पैसे वाला था। उसकी शहर में बहुत सी फैक्टरियां थीं। लावला शहर बहुत सुंदर था। अक्शर लोग वहां घूमने आया करते थे।


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रतन सिंह थोड़ा लालची था। इसलिए उसके कई दुश्मन बन गए थे। पर वह अपने कॉलेज के दोस्तों पर जान छिड़कता था। अक्शर वो लोग पार्टी किया करते थे और दोस्तों को सरप्राइज दिया करते थे।

लावण्या रतन सिंह को कॉलेज के दिनों से ही पसंद थी। पर अब उसने कुमार से शादी कर ली थी। कॉलेज के दिनों में उन्होंने बहुत मजे किए और शरारतें भी बहुत की।

एक दिन रतन सिंह को उसके टेबल पर एक चिट्ठी पड़ी दिखी। उसने जब उसे खोलकर देखा तो उसमें एक पार्टी का आमंत्रण था।

रतन सिंह लालची तो था ही इसलिए उसने सोचा कि उसके किसी दोस्त ने पार्टी में आमंत्रित किया होगा। इसलिए उसने उसकी ज्यादा छानबीन नहीं कि और वहां जाने के लिए तैयार हो गया।


शाम को जब वह पार्टी में जाने के लिए तैयार हुआ तो अचानक उसके चालक की तबियत खराब हो जाती है। इसलिए वह छुट्टी लेकर घर चला जाता है।

चालक न होने के कारण रतन सिंह को खुद गाड़ी चलाकर ले जाना पड़ता है।
जब वह पार्टी में पहुंचता है तो वह देखता है कि उसके सारे दोस्त वहां है।

 वह उनके पास जाता है और पूंछता है कि आखिर पार्टी दे कोन रहा है? उसके मुंह से यह बात सुनकर सब हैरान रह जाते हैं। वो कहते हैं कि उन्हें लगा कि पार्टी तुम दे रहे हो इसलिए वो पार्टी में आये। यह सुनकर रतन सिंह सबको सच बताता है कि यह पार्टी उसकी नहीं है।

 उसे भी किसी ने आमन्त्रित किया है। पर उसकी चिट्टी पर किसी का नाम नही लिखा था। तब वो सब सोचने लगते हैं कि आखिर पार्टी का आयोजन किया किसने है? लगभग वो सारी बाते भुला कर एन्जॉय कर रहे होते हैं।
 वहां अलग अलग तरह की शराब और खाने बहुत ही स्वादिष्ट व्यंजन होते हैं। सभी लोग खूब मजे ले रहे होते हैं।

जैसे ही ग्यारह बजते हैं तो सभी लोग अपने अपने घर चले जाते हैं। पर रतन और उसके दोस्त वहीं रुक जाते हैं। वो कहते हैं कि इतने दिनों बाद हम मिले हैं तो थोड़ा और वक्त साथ बिताना चाहिए।

फिर सब एक सोफे पर बैठ कर शराब पीने लगते हैं। तभी अचानक दरवाजा बंद हो जाता है। पर उन्हें कुछ पता ही नहीं चलता क्योंकि वो बहुत नशे में होते हैं। फिर वहां की लाइट चली जाती है।


लाइट जाते ही सब परेशान हो जाते हैं और उनमें से दो दोस्त फ्यूज जांचने के लिए वहां बिजली घर में जाने के लिए कहते हैं।

वो अंधेरे में अपने मोबाइल की लाइट जलाकर आगे बढ़ते हैं और इधर उधर फ्यूज ढूंढने लगते हैं। वो बहुत ढूंढते हैं पर उन्हें फ्यूज कहीं नहीं मिलता।

 इधर उन्हें गए हुए काफी देर हो जाती है तो सब सोंचने लगते हैं कि ये कामचोर कहां चले गए एक फ्यूज ढीक करने भेजा था और अभी तक नहीं आए। तभी अचानक लाइट आ जाती है और वो फिर से शराब पीने लगते हैं।

 फिर लावण्या कहती है कि उसको तो जोरों की भूख लगी है इसलिए वह खाना खाने जा रही है। इसपर लावण्या का पति कहता है कि उन दोनों को आ जाने दो फिर हम सब एक साथ खाना खाएंगे। वो सब थोड़ी देर और इन्तेजार करते हैं।

पर उन दोनों की कोई खबर ना होने के कारण लावण्या का पति कुमार उन्हें ढूंढने निकल जाता है। वह बिजली घर की तरफ़ जाता है तो देखता है कि उन दोनो की लाश वहां पड़ी होती है। उन्हें इस हालत में देखकर कुमार की चीख निकल जाती है। उसकी चीख सुनकर सब वहां पहुचते हैं।

उन्हें देखकर सब घबरा जाते हैं। सब यही सोचने लगते हैं कि आखिर उनकी ये हालत आखिर की किसने होगी। उन्हें आसपास किसी के होने की भी अनुभूति नहीं होती क्योंकि सब तो पहले ही जा चुके होते हैं।

उनकी हालत देखकर लावण्या कहती है कि मैं अब यहां नहीं रुक सकती मैं घर जा रही हूं। कुमार भी उसके साथ जाने के लिए तैयार हो जाता है। इसलिए सब वहां से जाने के लिए दरवाजे की तरफ बढ़ते हैं। पर दरवाजा बंद होता है।

वो दरवाजे को खोलने की बहुत कोशिश करते हैं। पर दरवाजा नहीं खुलता। वो उसे तोड़ने की भी कोशिश करते हैं पर वह नहीं टूटता। फिर वो खिड़की से मदद के लिए पुकारते हैं पर उनकी बात कोई नहीं सुन पाता।

 फिर वो सब हताश होकर सोफे पर बैठ जाते हैं और एक ही बात कहते हैं कि आखिर उनके साथ ये कर कौन रहा है। सबका शक रतन सिंह की तरफ जाता है।

क्योंकि उनकी चिट्ठी रतन सिंह के नाम की होती है फिर रतन सिंह उन्हें समझाता है और कहता है कि उसने उन्हें कोई चिठ्ठी नहीं लिखी बल्कि उसे खुद उसके टेबल पर चिठ्ठी मिली थी। फिर वह कहता है कि वो भी तो उन सबके साथ फंसा हुआ है।


फिर सब थोड़ी देर के लिए शांत हो जाते हैं। तभी रतन सिंह को फ़ोन करके मदद मांगने का विचार आता है। सब पुलिस को फ़ोन लगाने लगते हैं। पर किसी के भी फ़ोन में नेटवर्क नहीं होते हैं।

नेटवर्क न होने की वजह से किसी के भी फ़ोन से फ़ोन नहीं लगता। इसलिए वो और ज्यादा हताश हो जाते हैं।
तभी वहां की लाइट फिर गड़बड़ करने लगती है।  लाइट कभी आती है तो कभी चली जाती है। बल्ब फ्यूज होकर फूटने लगते हैं।

उन्हें वहां अजीब अजीब आवाजे सुनाई देने लगती हैं। फिर वहां एक तेज आवाज आने लगती है जिसकी वजह से उनके कानों से खून निकलने लगता है। जिसकी वजह से वो बेहोश हो जाते हैं।

जब उनकी आंखें खुलती है तो वो अपने आप को एक खंडहर जैसे घर में पाते हैं। वहां बहुत डरावनी डरावनी चीजे रखी होती हैं। जिन्हें देखकर उनके होश उड़ जाते हैं।  फिर वो वहां से भागने की कोशिश करते हैं।

घर से बाहर आकर वो देखते हैं कि वो एक जंगल में है। जहां दूर दूर तक उन्हें कुछ नजर नहीं आता ।  फिर भी वो हिम्मत करके जंगल में आगे बढ़ते हैं।  थोड़ी ही दूर पर उन्हें तीन रस्सी से लटके कंकाल दिखाई देते हैं।

उन्हें देखकर वो आपस में बतलाने लगते हैं कि इन्हें आखिर इसतरह यहां किसने लटकाया होगा। तभी उस घर से जोर जोर से किसी के चीखने की आवाज सुनाई देती है। तो वो सब तेजी से घर की तरफ जाकर देखते हैं कि आखिर चीखा कौन?

वो जल्दी से अंदर घुसते हैं और देखते हैं कि उनकी एक और दोस्त मारी जा चुकी होती है। उसके उसी घर में गर्दन से बांधकर लटका हुआ देखकर वो बहुत डर जाते हैं और जंगल से निकलने का प्रयास करते हैं। उन्हें कहीं भी रास्ता नहीं मिलता वो बस चलते ही जाते हैं।

पीछे रह गए दो दोस्तों को पेड़ के पास कोई बैठा दिखाई देता है। वो उसके पीछे जाते हैं जिस कारण अपने साथियों से वो बिछड़ जाते हैं।
वो उसका पीछा कर ही रहे होते हैं कि तभी पेडों से रस्सी नीचे आती है और उनकी गर्दन में फंस जाती है। फिर वो भी फांसी के फंदे पर झूलने लगते हैं।


अब सिर्फ वो तीन ही बचते हैं। अपने दोस्तों की मृत्यु से उनको बहुत सदमा पहुंचता है। वो फिर तेय करते हैं कि वो उस घर में वापस जाएंगे और पता करेंगे कि आखिर उनके साथ ये कर कौन रहा है।

 वो घर का कोना कोना ढूंढते हैं पर उन्हें ऐसी कोई चीज नहीं मिलती जिससे यह पता चल सके कि आखिर उनके साथ ये कर कौन रहा है। तभी लावण्या को एक तहखाना दिखाई देता है वो उसके अंदर जाते हैं। वो वहां देखते हैं कि वहां बहुत सी सारा सामान पड़ा होता है।

वो वहां ढूंढते हैं तो लावण्या को एक डायरी मिलती है। जिसमें एक फोटो लगी होती है जो कि उनके कॉलेज की एक लड़की की होती है। वो उस डायरी को पढ़ते हैं जिसमें उस लड़की की आपबीती लिखी होती है।

उसमें लिखा होता है कि कॉलेज में कुछ लोगों ने उसकी इज्जत के साथ खिलवाड़ किया है। उन्होंने उस लड़की को कहीं भी मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा। उन्होंने मेरे साथ खिलवाड़ किया है। इसलिए में आत्महत्या करने जा रही हूं।


उन्हें यह पढ़कर बहुत आश्चर्य होता है क्योंकि उन्हें बस यह छोटा सा मजाक लगता है जो उन्होंने उस लड़की के साथ किया था। अब वो उस लड़की से मांफी मांगने लगते हैं और उसे बुलाने लगते हैं।

 वो उससे उन्हें मांफ कर देने के लिए आग्रह करते हैं। तभी वहां उस लड़की की आत्मा आ जाती है। उसका भयानक रूप देखकर सब डर जाते हैं और उससे कहते हैं कि हमने तो तुम्हारे साथ एक छोटा सा मजाक किया था।

हमें नहीं पता था कि तुम आत्महत्या कर लोगी। हम अपनी गलती की तुमसे मांफी मांगते हैं।
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कृपया करके हमे यहां से जाने दो। तब वह लड़की कहती है कि किसी की इज्जत के साथ खिलवाड़ करने को तुम छोटा सा मजाक कहते हो। मरोगे तुम सब मरोगे। Mout ki chitthi

 तुम्हारी वजह से मेरे माता पिता ने आत्महत्या कर ली। मैं तुम्हे जिंदा नहीं छोडूंगी। ऐसा कहते हुए वह गायब हो जाती है। फिर रतन सिंह कहता है कि इसे मुक्त कराने का कोई तो रास्ता होगा।

 तब कुमार कहता है कि मैंने सुना है अगर आत्मा से जुड़ी हर वस्तु को अगर जला दिया जाए तो वह आत्मा मुक्त हो जाती है। फिर देर न करते हुए सबने सबने उससे जुड़ी वस्तुओं को इक्कठा करना शुरू कर दिया। वो उसकी सभी चीजों को आंगन में इक्कट्ठा करते हैं।

फिर कुमार पेट्रोल ढूंढने के लिए जाता है। तब तक वह आत्मा समझ जाती है कि ये लोग उसे मुक्त कराना चाहते हैं। पर वह इन्हें मारे बिना मुक्त नहीं होना चाहती थी।
जब कुमार पेट्रोल ढूंढ रहा होता है तो वह आत्मा अचानक उसके सामने आ जाती है। वह कुमार के शरीर के अनगिनत टुकड़े कर देती है। कुमार वहीं मर जाता है।

इधर रतन उस आत्मा के माता पिता के कंकाल को लेने के लिए जाता है। वह उन्हें खोलकर ला ही रहा होता है कि तभी उसके सामने वह आत्मा आ जाती है।
रतन उस आत्मा से बचते बचते हुए कंकालों को दरवाजे पर लाकर डाल देता है। पर आत्मा के हमलों की वजह से वह भी मर जाता है।

 इधर लावण्या हिम्मत करके पेट्रोल को पूरे घर पर छिड़क देती है। उसके पास आग जलाने के लिए माचिस या लाइटर नहीं होता इसलिए वह कुमार की तरफ दौड़ती हुई जाती है।

 वह कुमार की जेब से लाइटर को निकाल लेती है पर जैसे ही वह ऐसा करती है तो आत्मा उसपर अपनी शक्ति से आंगन में पड़े सामान को उसके ऊपर फेंकने लगती है। इसकी वजह से लावण्या घायल हो जाती है। पर वह हिम्मत नहीं हारती और लाइटर को जलाकर आग लगा देती है।

वह आग लगाकर घर से बाहर की ओर भागती है। पूरा घर आग की लपटों में तब्दील हो जाता है। जब लावण्या घर के बाहर खड़ी होती है तो वह आत्मा उसे हवा के झोंके के साथ घर के अंदर खींच लेती है।

 अब लावण्या भी आग में जलने लगती है और आत्मा अपने काम मे सफल हो जाती है।

इधर पुलिस उस पार्टी वाले घर में पहुंच कर हत्या की छानबीन करती है। पर उन्हें कोई सबूत न मिलने की वजह से केस को बंद करना पड़ता है।

इस तरह एक चिट्ठी mout ki chitthi कई लोगों की मौत का कारण बनती है।

पढ़ने के लिए धन्यवाद


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